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Journal of Consumer Marketing Article
फ्री सैंपल मिलने पर ग्राहक का तुरंत खरीदारी व्यवहार किस तरह बदलता है, इसके बारे में विस्तार से जानिए और अपने मार्केटिंग टूल्स बेहतर बनाइए।
मोबाइल एप्स और वेबसाइट्स के मार्केटिंग टूल्स लगातार बदल रहे हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण सवाल ये है कि क्या फ्री सैंपल वास्तव में ग्राहक की खरीदारी को बढ़ाते हैं? कई ब्रांड बिज़नेस ग्रोथ के लिए इस टूल को अपनाते हैं, लेकिन जब तक ग्राहकों पर इसका असर ठीक से नापा न जाए, तब तक यह प्रयास बेकार हो सकता है।
कैसे हल निकलता है
इस समस्या के समाधान के लिए कई रिसर्च सामने आई हैं। खासतौर से, कुछ रिसर्च ने दिखाया कि फ्री सैंपल से क्लाइंट्स की इमीजिएट खरीद बढ़ जाती है, खासकर कम दाम की खरीद के मामलों में। ये टूल ग्राहक को प्रोडक्ट की टेस्टिंग का अवसर देता है और तुरंत असर डालता है।
साइट या एप के फीचर्स में ग्राहक को तुरन्त एक मुफ्त सैंपल प्राप्त कराना सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। केवल कुछ ही शर्तें होती हैं—जैसे पहली बार खरीदी या साइनअप के साथ फ्री सैंपल। ग्राहक को सैंपल मिलने के बाद अक्सर वह अन्य वेराइटी भी खरीदता है।
फ्री सैंपल देने की प्रक्रिया काफी स्वचालित हो गई है। मोबाइल ऐप में ग्राहक के इनटरेक्शन पर आधारित पर्सनलाइज़्ड रिवॉर्ड्स मिलते हैं, जिसमें तुरंत रिडीम कोड या वाउचर शामिल हैं। यह सेगमेंटेशन रणनीति उन्हें ऐंव फ्रेश कस्टमर जर्नी और बेहतर कॉन्वर्ज़न रेट्स के लिए प्रेरित करती है।
फायदे
पहला बड़ा फायदा है—वास्तविक ग्राहक अनुभव। जब यूजर को बिना खर्च किए नया प्रोडक्ट मिलता है, तो उनकी खरीदारी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
दूसरा लाभ यह है कि फ्री सैंपल देने से ब्रांड अवेयरनेस भी तेज़ी से बढ़ती है। ग्राहक खुद-ही-खुद सोशल मीडिया और अपने सर्कल्स में अनुभव साझा करने लगते हैं।
कमियां
फ्री सैंपल देने के कुछ नुकसान भी हैं। जैसे, सिर्फ सैंपल पर ही ध्यान केंद्रित करने वाले ग्राहक बार-बार खरीदारी नहीं करते।
दूसरी ओर, सैंपलिंग की लागत हमेशा हर कंपनी के लिए फायदेमंद नहीं हो सकती, खासकर जब बड़े स्तर पर किया जाए तो बजट बिगड़ सकता है।
फैसला
फ्री सैंपल का विनियोग एक बेहतरीन मार्केटिंग टूल है, बशर्ते इसे सही टारगेटिंग, डाटा एनालिटिक्स और मापनीय ऑनबोर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जाए। कुल मिलाकर, इससे ब्रांड की बिक्री में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा सकती है।